पहली चुदाई का अहसास भाभी की चूत के साथ

मेरा नाम सुनील है. मेरा घर छत्तीसगढ़ के कोरीया जिले में एक छोटे से गाँव में है। मैं निरंतर आप सबकी प्यारी sexstoryinhindi.in का पाठक हूँ।

मैं अपनी पहली कहानी आप लोगों के पास भेज रहा हूँ।

उस समय मैं 12वीं क्लास में था, मेरे भैया की शादी होने वाली थी। उस समय मेरे घर में केवल एक ही मोबाइल था.. जो मेरे पास रहता था।

जब भैया की शादी तय हुई.. तो जब कभी भी मेरी भाभी ममता को कोई चीज़ पूछनी होती थी.. और वो फोन करती थीं.. तो फोन मैं ही उठाता था।

पहली चुदाई का अहसास भाभी की चूत के साथ

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इस तरह से शादी से पहले ही भाभी से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी।

फिर भैया की शादी हो गई.. जब भाभी पहली बार घर आईं.. तब मैंने भाभी का कोमल बदन देखा.. वो बहुत प्यारी लगती थीं.. और सेक्सी भी बहुत थीं। उनकी आयु उस समय 18 साल की थी.. और वो 11वीं क्लास में थीं। वो थीं तो मुझसे भी छोटी.. मगर उनके मम्मे एकदम कड़क दिखते थे.. एकदम बड़े-बड़े.. जबकि वो स्लिम थीं..

मैं उनको देखते ही उन पर फिदा हो गया और उनको चोदने का ख़याल मेरे मन में आने लगा।

वो मेरे साथ दिन बिताती थीं.. मेरे बगैर खाना नहीं खाती थीं। जब मैं देर से घर आता.. तो मेरा इन्तज़ार करती थीं, तब जाकर हम खाना खाते थे.. क्योंकि शादी से पहले ही हम खूब बात किया करते थे.. तो एक-दूसरे के प्रति उस समय से ही रुझान बढ़ गया था..

मगर मैंने अपने मन से भाभी को चोदने का ख़याल हटा दिया.. क्योंकि वो मेरी भाभी थीं और हमारे परिवार वाले सभी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और विश्वास करते हैं।

जिस कारण मेरे और मेरे भाभी को साथ खाने से बहुत रात तक साथ रहने से कोई नहीं रोकता था।

मैंने पूरी तरह से यह बात दिमाग़ में डाल ली थी कि मैं भाभी को ग़लत नज़रिए से कभी नहीं देखूँगा।

मगर एक दिन मैं अपनी फोटो लेकर कॉलेज में फर्स्ट इयर के एड्मिशन के लिए जा रहा था.. तो भाभी ने मेरी फोटो छीन लीं.. और वो मेरे बहुत मांगने पर भी नहीं दे रही थीं।

मैंने फोटो लेने की बहुत कोशिश की लेकिन उनसे नहीं ले पाया। मैं निराश होकर जाने लगा.. तो भाभी ने फोटो अपने ब्लाउज के अन्दर डाल लीं और बोलीं- निकालने की हिम्मत है तो निकाल लो..

आज एडमिशन की लास्ट डेट भी थी.. और मुझे देर भी हो रही थी। मेरे पास दूसरे फोटो भी नहीं थे.. तो मेरे पास हाथ डाल कर निकालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था, मैंने भाभी के ब्लाउज के अन्दर हाथ डाल दिया।

भाभी एकदम से सिहर उठीं। हाथ अन्दर डालते ही मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.. तो मैंने भाभी के मम्मों को दबा दिया और फोटो ढूँढने का बहाना करके थोड़ी देर तक हाथ उनके अन्दर ही रहने दिया।

भाभी को भी मज़ा आ रहा था.. वो बस हँस रही थीं।

तभी मेरी बहन मोबाइल माँगने के लिए आ गई.. उसे देख कर मैं डर गया। मैंने तुरंत हाथ खींच लिया.. शायद मेरी बहन ने ये सब देख लिया था.. मगर वो कुछ नहीं बोली और मोबाइल लेकर चली गई।

अब मैं कॉलेज चला गया.. और दिन भर भाभी को चोदने के बारे में सोचता रहा। घर आते वक़्त मैंने भाभी के नाम की तीन-चार बार मुठ भी मारी। मैंने कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था..

अब मैं मौके की तलाश करने लगा। मेरे पापा और एक भाई बड़े शॉप में नाइट ड्यूटी करते हैं। उस दिन मेरे पापा और मेरी माँ कहीं रिश्तेदार के यहाँ गई थीं और मेरे भैया ड्यूटी गए थे। मुझे मौका मिल गया.. मेरे घर में 3-4 कमरे ही हैं। उस रात घर पर में मेरी बहन और भाभी ही थीं।

मेरी बहन मेरी भाभी की उम्र की ही है.. मगर वो एक बार सो जाती है.. तो उसे जगाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

जब मैं रात को घर आया.. तो मेरी बहन सो गई थी.. भाभी ने दरवाजा खोला।

मेरे अन्दर आते ही उन्होंने बता दिया कि भैया घर में नहीं हैं और मम्मी-पापा भी बाहर गए हैं।

मैं तो था ही मौके की तलाश में..

जब भाभी मुझको खाना देने लगीं.. तो मैंने पीछे से उनको कस कर जकड़ लिया। भाभी एकदम से कसमसाईं.. मैं उनके पीछे से ही उनके मम्मों को दबाने लगा।

भाभी थोड़ा मना करने लगीं और अपने आप को मुझसे छुड़ाने लगीं। फिर मुझे धक्का देकर अलग कर दिया.. मैं डर गया और भाभी को सॉरी बोला- आप भैया को ना बताएं.. मैं दोबारा ऐसा कभी नहीं करूंगा। वो मान गईं।

मेरा लंड एकदम से तन गया था.. इस कारण में अभी भी जोश में था। मैंने खाना खाया और सोने चला गया। भाभी और बहन मेरे ही कमरे में सोई हुई थीं।

उनका बिस्तर नीचे ज़मीन पर लगा था.. क्योंकि अकेले उनको थोड़ा डर लगता था।

मैं फिर से भाभी को चोदने के लिए सोचने लगा और प्लान बनाने लगा।

जब भाभी सो गईं.. तब मैं धीरे से उठा और भाभी के साइड में जाकर सो गया मुझे डर लग रहा था कि भाभी ने अभी थोड़ी देर पहले ही मना किया था.. लेकिन मैं हवस की आग में जल रहा था.. मैं धीरे-धीरे भाभी के मम्मों को सहलाने लगा.. और भाभी से चिपक गया।

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थोड़ी ही देर में भाभी जाग चुकी थीं और गर्म भी हो चुकी थीं.. जिस कारण उन्होंने धीरे से मेरे कान में कहा- तुम क्या कर रहे हो.. अभी मैंने मना किया था और बहन जाग गई तो?

इस बात से मेरी समझ में आ गया कि भाभी चुदने को तैयार हैं.. मगर बहन की वजह से डर रही हैं।

मैंने कहा- वो नहीं जागेगी.. उसको उठाना मुश्किल काम होता है।

उन्होंने मुझे अपने बिस्तर में जाने को कहा.. पर मैं नहीं माना और भाभी के मम्मों को दबाता रहा.. धीरे-धीरे भाभी और गरम हो गईं.. तो मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोलने लगा.. वो मना करने लगीं मगर थोड़ी देर बाद मान गईं।

भाभी ने कहा- तुम्हारे बिस्तर पर चलते हैं।

मैं मान गया और हम दोनों मेरे बिस्तर में आ गए, मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया, अब वो मेरे सामने आधे कपड़ों में थीं, उनके एकदम गोल-गोल.. दूध से सफेद मम्मे दिख रहे थे।

मैं तो यह देखकर एकदम से उन पर झपट पड़ा.. और उनको चूसने लगा।

भाभी के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं और वो मेरे सर को पकड़ कर अपने मम्मों में दबाने लगीं।

वो धीरे से मेरे कान में बोलीं- मैं तुमसे कब से चुदवाना चाहती थी.. मगर तुमने कभी शुरूआत ही नहीं की।

मैं यह सुन कर दंग रह गया और उनके मम्मों को यूँ ही चूसे जा रहा था, भाभी सिसकारियाँ ले रही थीं।

फिर मैंने भाभी की साड़ी और पेटीकोट को भी उतार दिया। भाभी काले रंग की पैन्टी में थीं.. एकदम गोरी-चिट्टी दिख रही थीं। मैं ऊपर से ही भाभी की चूत को मसलने लगा, भाभी एकदम मस्त हुए जा रही थीं.. मैंने उनकी पैन्टी को भी उतार दिया।

भाभी की चूत भी गोरी थी.. उस पर एक भी बाल नहीं था.. शायद उन्होंने आज ही शेविंग की थी।

मैं उनकी चूत को ऊपर से रगड़ने लगा भाभी के मुँह से ‘श्श्हह..’ की आवाज़ निकल रही थी।

मैंने दो उंगलियां उनकी चूत में घुसा दीं और उंगली से ही भाभी को चोदने लगा.. भाभी मज़े ले रही थीं।

मेरा एक हाथ उनके मम्मों में और एक हाथ उनकी चूत में था और उनके होंठों को चूसे जा रहा था।

भाभी मुझे कस कर पकड़ रखे थीं। थोड़ी देर में भाभी अकड़ने लगीं और मुझे कस कर दबाया और झड़ गईं। मेरे हाथ में भाभी का सारा रस आ गया।

फिर मैं भाभी को फिर से गरम करने लगा। करीब 5 मिनट बाद भाभी फिर गरम हो गईं और मेरा साथ देने लगीं।

इस बार मैंने देरी ना करते हुए उनकी टाँगों को अलग करते हुए फैलाया। अपने लंड के टोपे में थोड़ा थूक लगाया और भाभी की चूत की दरार में डाल दिया।

भाभी सिहर उठीं.. उनको थोड़ा दर्द हुआ। यह मेरा फर्स्ट टाइम था जब मैं किसी के साथ सेक्स कर रहा था.. तो शायद मेरे लंड की चमड़ी कट गई थी.. मुझे भी थोड़ा दर्द हो रहा था।

मैंने देखा- भाभी की चूत से खून बह रहा था.. मगर मैं समझ गया कि यह भाभी का खून नहीं.. बल्कि मेरा है।

थोड़ी देर तक लौड़ा डालकर यूँ ही भाभी को किस किए जा रहा था.. पर भाभी अपनी चूत उठा-उठा कर मुझे चोदना चाह रही थीं.. शायद उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

मैंने भाभी की कमर पकड़ी और लंड को अन्दर-बाहर करने लगा।

भाभी ‘आहह.. आहह..’ करने लगीं। मैं उनके होंठों को दबा कर रखे हुए था.. ताकि उनकी आवाज़ ज्यादा ना हो सके।

लेकिन मेरी चुदाई की स्पीड बढ़ने से मेरी बहन जाग चुकी थी.. मैंने ध्यान दिया कि वो हमारी तरफ चादर हटाकर चुपके से देख रही थी.. पर हवस की वजह से मैं नहीं रुका और भाभी को चोदे जा रहा था।

थोड़ी ही देर में भाभी ने अपना पानी छोड़ दिया.. पर मेरा अभी बाकी था।

भाभी मुझे कस कर पकड़ रखे थीं.. शायद अब उन्हें दर्द हो रहा था.. पर मैं कहाँ रुकने वाला था।

भाभी के झड़ने के दो मिनट बाद मैं भी झड़ गया और भाभी के ऊपर लेट गया, लगभग 15 मिनट तक मैं यूँ ही पड़ा रहा।

थोड़ी देर में भाभी ने मुझे उठने को कहा और कहा- तुम्हारी बहन जाग जाएगी।

मैंने भाभी को बताया- वो जाग चुकी है.. और हमें देख रही थी।

यह सुन कर भाभी डर गईं कि कहीं वो भैया को ना बता दे.. पर मैं जानता था कि मेरी बहन मेरे भैया से ज़्यादा मुझसे प्यार करती है.. वो कभी ऐसा नहीं करेगी।

जब भाभी उठने की कहने लगीं.. तब मैंने अपना लंड निकाला तो देखा कि लण्ड खून से लथपथ था और मुझे दर्द भी होने लगा था।

भाभी ने कहा- एक दो दिन में ठीक हो जाएगा..

मैं कपड़े पहन कर सो गया।

भाभी भी बहन के बिस्तर में चली गईं.. वो सोने का नाटक कर रही थी।

इस तरह मुझे अब जब भी मौका मिलता तो भाभी को चोद लेता था।

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मैं तो कभी-कभी सवेरे जब सभी लोग बाहर जाते थे.. तो मौका पाकर भाभी को चोदा करता हूँ.. गर्मी के मौसम में ज़्यादा मौके मिलते हैं क्योंकि भैया अक्सर शादियों में जाया करते हैं।

और अब तो मेरी बहन की भी शादी हो चुकी है.. तो जिस रात मेरे भैया नहीं रहते.. मैं सारी रात भाभी के साथ होता हूँ और उन्हें चोदता हूँ।

मेरा और मेरी भाभी का कमरा एकदम अगल-बगल में है। मेरे पापा-मम्मी का कमरा थोड़ा हट कर है.. एक-दो कमरे बाद है.. तो किसी को पता भी नहीं चलता।

मुझे आशा है कि आपको मेरी कहानी अच्छी लगी होगी। यह मेरी sexstoryinhindi.in पर पहली कहानी है।

By tharki

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