मेरी और संजना की मुलाकात हमारे फैमिली फ्रेंड के घर पर हुई थी जब मैं संजना से पहली बार मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत ही अच्छा लगा। संजना से मेरी मुलाकात मेरे भैया ने करवाई थी और यह हम दोनों की पहली ही मुलाकात थी लेकिन उस दिन संजना की बातों ने मुझ पर काफी गहरी छाप छोड़ी थी जिसके बाद मैं संजना से बात करना चाहता था।

हालांकि उसका कोई कांटेक्ट नंबर या फिर कोई भी जानकारी मेरे पास नहीं थी लेकिन जब मैंने संजना को फेसबुक के माध्यम से ढूंढने की कोशिश की तो उसका फेसबुक प्रोफाइल मुझे मिल गया और मैंने उसे फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी।

मैं उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज चुका था और उसके बाद जब मैं और संजना एक दूसरे से बात करते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता। मैं और संजना एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश थे हम दोनों की एक दूसरे से फोन पर काफी बातें होने लगी थी।

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हम दोनों को बात करते हुए करीब 3 महीने बीत चुके थे लेकिन उसी बीच एक दिन संजना ने मुझे कहा कि रोहित मुझे तुमसे मिलना है। हम दोनों के बीच सिर्फ दोस्ती थी लेकिन मैं चाहता था कि हम दोनों की दोस्ती प्यार में तब्दील हो जाए लेकिन उससे पहले ही संजना ने मुझे जब यह बात बताई तो मुझे बहुत ही बुरा सा महसूस हुआ।

मैं संजना को उस दिन मिलने के लिए गया मै जब संजना को मिलने के लिए गया तो मुझे नहीं मालूम था कि संजना उस दिन मुझे कुछ बुरी खबर सुनाने वाली है। उस दिन संजना ने मुझे कहा कि वह जॉब करने के लिए मैं बैंगलुरु जा रही है मैंने उसे कहा कि लेकिन तुम्हें जॉब करने के लिए बेंगलुरु जाने की जरूरत क्या है। वह मुझे कहने लगी कि दरअसल मेरा बेंगलुरु की कंपनी में सिलेक्शन हो चुका है और मुझे वहां पर अच्छी सैलरी भी मिल रही है।

मैंने संजना को कहा तुम यहां रहकर भी तो जॉब कर सकती हो तो संजना कहने लगी कि नहीं रोहित मैं चाहती हूं कि मैं बेंगलुरु चली जाऊं। मैं इस बात से बहुत ज्यादा दुखी था और मैं यह सोच रहा था कि अगर संजना मुझसे दूर चली गई तो मुझे बहुत ही बुरा लगेगा। मैंने जब संजना को जाने से मना किया तो वह मेरी बात नहीं मान रही थी वह चाहती थी कि वह किसी भी तरीके से बेंगलुरु चली जाए।

उस दिन मेरा संजना से बिल्कुल भी बात करने का मन नहीं था लेकिन फिर भी हम लोग काफी देर तक साथ में बैठे रहे। संजना ने मुझसे कहा कि रोहित अब मैं चलती हूं और फिर वह घर चली गई मैं भी अपने घर लौट आया था लेकिन मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था मेरा मन उस दिन किसी से बात करने का नहीं था।

मेरी मां ने मुझे कहा कि रोहित बेटा तुम खाना खा लो तो मैंने उन्हें कहा कि नहीं मां मेरा आज खाना खाने का बिल्कुल भी मन नहीं है मैंने उन्हें मना कर दिया था। उस रात मुझे नींद भी नही आ रही थी और ना ही मैंने उस दिन खाना खाया था मैं और संजना एक दूसरे को हर रोज मिला करते थे लेकिन अब संजना बेंगलुरु जाने वाली थी।

उसने मुझे बताया कि रोहित मैं कल बैंगलुरु जा रही हूं तो मुझे बहुत ही बुरा लगा मैं उसे कुछ कह ना सका और वह अगले दिन बेंगलुरु चली गई संजना के बेंगलुरु चले जाने के बाद मैं काफी ज्यादा दुखी हो गया था। 

कुछ दिनों तक तो मेरा बिल्कुल मन नहीं लग रहा था और ना ही मेरा किसी भी काम में मन लग रहा था करीब एक हफ्ता हो चुका था मैंने संजना को फोन भी नही किया था और ना हीं उसका मुझे कोई फोन आया था लेकिन मैं चाहता था कि मैं उससे बात करूं।

मैंने उस दिन जब उसको फोन किया तो संजना ने मेरा फोन उठाया और मुझसे कहने लगी कि रोहित तुम मुझे आज काफी दिनों बाद फोन कर रहे हो। मैंने संजना को कहा कि तुमने भी तो मुझे फोन नहीं किया मैं भी तुम्हारे फोन का इंतजार कर रहा था वह मुझे कहने लगी कि मैं तो अपने काम में बिजी थी इसलिए मैं तुम्हें फोन नहीं कर पाई यहां पर मुझे सब कुछ खुद ही देखना है।

मैंने संजना को कहा कि चलो कोई बात नहीं मैंने उससे कहा कि तुमने अपना ऑफिस ज्वाइन कर लिया होगा तो वह कहने लगी कि हां मैंने अपना ऑफिस ज्वाइन कर लिया है और अब ऑफिस में मेरे कुछ दोस्त भी बन गए है।

संजना और मैं अब हम दोनों एक दूसरे से सिर्फ फोन पर ही बात कर सकते थे मैं चाहता था कि संजना पुणे वापस आ जाए लेकिन संजना अभी तक वापस नहीं आई थी और वह बेंगलुरु में ही थी। हम दोनों की सिर्फ फोन पर ही ज्यादातर बातें होती थी।

जब एक दिन संजना ने मुझे बताया कि वह अपने मम्मी पापा से मिलने के लिए आ रही है तो मैं बहुत ही खुश हुआ मैंने सोचा कि चलो इस बहाने संजना से मुलाकात तो हो जाएगी। काफी महीना हो गए थे जब से मैंने संजना को देखा भी नहीं था और ना हीं मेरी उससे बैठकर कोई बात हुई थी अब संजना जल्दी पुणे आने वाली थी।

जब संजना पुणे आई तो मैं और संजना एक दूसरे से मिले मैं संजना से काफी महीनों बाद मिल रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा मैं चाहता था कि संजना कुछ दिनों तक पुणे में ही रहे। संजना ने मुझे कहा कि रोहित मुझे तुमसे कहना कुछ कहना है, मुझे नहीं मालूम था कि संजना मुझसे क्या कहना चाहती है लेकिन जब संजना ने मुझसे अपने दिल की बात कही तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि संजना मुझे प्रपोज करेगी।

मैंने उसके बाद संजना को कहा कि तुम यही पुणे में ही जॉब क्यो नहीं कर लेती लेकिन संजना ने कहा कि नहीं मैं बेंगलुरु में ही जॉब करूंगी।

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कुछ दिनों तक वह घर पर ही रुकने वाली थी इसलिए हम लोग हर रोज मिला करते थे मैंने संजना को कई बार इस बारे में समझाने की कोशिश भी की लेकिन वह मेरी बात मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी और वह कुछ दिनों बाद बेंगलुरु जाने वाली थी। हम दोनों एक दिन साथ में बैठे हुए थे उस दिन संजना और मैं एक दूसरे से बात कर रहे थे उसने मुझे कहा रोहित में कुछ दिनो बाद बेंगलुरु चली जाऊंगी।

मैंने उसे कहा क्या तुम कुछ दिनों के लिए यहां रुक नहीं सकती वह कहने लगी तुम तो जानते ही हो मैंने ऑफिस से करीब 15 दिनों की छुट्टी ली है और अब 15 दिन भी खत्म होने वाले हैं। मैंने उसे कहा फिर भी तुम कुछ दिन और रुक जाओ वह कहने लगी ठीक है मैं कोशिश करती हूं उस दिन हम दोनों साथ में बैठे थे तो उस दिन मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए उसे एक रिंग पहना दी।

वह बहुत ही खुश हुई उसने मुझे गले लगा लिया जब उसने ऐसा किया तो मैंने उसे कहा मैं तुमसे बहुत ही ज्यादा प्यार करता हूं। वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी उस दिन वह मेरे साथ कुछ समय बिताना चाहती थी। 

हम दोनों की रजामंदी से हम दोनों होटल मे चले गए होटल के कमरे में जब हम लोग थे तो मैं और संजना एक दूसरे से बात कर रहे थे बातें कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी मैंने उसकी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया था उसके बाद तो जैसे हम दोनों की गर्मी बढने लगी।

मैने उसके बदन को महसूस करना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा। वह अब मेरी गोद में आकर बैठ गई उसने मेरे अंदर की आग को और भी बढा दिया मैंने उसकी गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ाकर रख दिया था। वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तड़प रही थी मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत मारने के लिए तैयार हूं।

मैंने अब उसके कपड़े उतारने शुरू किए मैने उसकी पैंटी ब्रा को भी उतार दिया मैं उसके बदन को बड़े अच्छे तरीके से महसूस करने लगा था और उसके होठों को मैं चूमने लगा था उसके होठों को चूमकर मेरे अंदर की गर्मी बढ़ने लगी थी। 

मुझे बहुत मजा आने लगा था मैं जिस प्रकार से उसके होठों को चूम रहा था उससे मेरे अंदर की आग इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैं उसकी चूत मारने के लिए तैयार था मैंने उसके बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था।

वह भी मेरे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती थी उसने मेरे लंड को बाहर निकालकर उसे अपने मुंह में लेने के लिए अपने हाथ को आगे बढ़ाया। वह मेरे लंड को अपने हाथों से हिला रही थी उसको बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत ही अच्छा महसूस होने लगा था।

अब वह मेरे लंड को अपने मुंह मे ले चुकी थी मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को ऐसे ही चूसती रहो मेरे लंड को वह अपने मुंह के अंदर लेकर अच्छे से चूसती तो मुझे बहुत मजा आने लगा था। मेरे अंदर की आग अब बढ़ने लगी थी मै उसकी चूत को चाटने लगा जब मैं उसकी चूत को चाटता तो मुझे मजा आने लगा था और मेरे अंदर की गर्मी बहुत बढ़ने लगी थी उसकी चूत से निकलता हुआ लावा पूरी तरीके से बढ़ चुका था।

मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता हूं मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डाल दिया। मेरा लंड उसकी चूत को फाडता हुआ अंदर चला गया उसकी चूत से खून निकल रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था वह जिस प्रकार से मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकडने की कोशिश कर रही थी।

मै उसको तेजी से चोद रहा था मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया उसको चोदकर मजा आ रहा था कुछ देर की चुदाई का आनंद लेने के बाद मेरा माल बाहर गिर गया था जब मेरा माल गिरा तो हम लोग कुछ देर बैठे रहे फिर वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती तो वह अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी।

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मैंने उसको घोडी बना दिया घोड़ी बनाने के बाद जब मैंने उसकी चूत मे लंड डाला तो मै उसे चोदने लगा मुझे मजा आने लगा था। उसको चोदकर मुझे इतना मजा आने लगा था कि मैं एक पल भी अब रह नहीं पा रहा था। 

मैंने उसे बड़ी तेज गति से चोदना शुरू किया मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था। उसका बदन गर्म होने लगा था मैंने उसको तेजी से चोदा जब मे अपने वीर्य को उसकी चूत के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई। उसके कुछ दिनो बाद वह बैंगलोर चली गई।

By tharki

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